छठ पर्व हल्द्वानी में धूमधाम से मनाया गया

छठ पर्व हल्द्वानी में धूमधाम से मनाया गया

छठ पर्व में सूर्य देव की उपासना की जाती है। यह पर्व दिवाली के बाद आता है। इस उत्सव को छठ. छठी, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी आदि भी कहा जाता हैं। इस पर्व  में महिलाएं उपवास रख छठ माँ की उपासना कर, योग्य संतान की कामना, संतान और परिवार की समृधि की कामना के लिए किया जाता हैं, पुरुष इस पर्व पर महिलाओं का कंधे से कंधा मिला साथ देते हैं।
छठ पूजा chhath puja haldwani

हलवानी में सुशीला तिवारी हॉस्पिटल के निकट – छठ पूजा स्थल हैं, जहाँ हजारों की संख्यां में व्रती महिलाओं ने नहर में खड़े होकर 26 अक्टूबर को सूर्यास्त के समय और 27 अक्टूबर को सूर्योदय के श्रदालूओं ने इकठ्ठा होकर सूर्य को अर्ध्य देकर मनोकामना की और बहुत धूमधाम से इस पर्व को मनाया। इस पर्व पर नगर के गणमान्य और आम लोगों ने भी भाग लिया। छठ समिति ने पंडाल को आकर्षक रूप देकर सजाया था और पर्व संपन्न होने के आयोजन समिति ने प्रसाद वितरण किया गया.

blessings of chhath maiya haldwani 2017पर्व सूर्य और उसकी शक्ति को समर्पित होता है। लोग सूर्य को अच्छी सेहत देने, खुशियां और उनकी रक्षा करने के लिए धन्यवाद करते हैं। छठ का भोजपुरी में अर्थ होता है छठा दिन। कार्तिक महीने की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाया जाने वाला ये त्यौहार चार दिनों तक चलता है। मुख्य पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की छठी के दिन की जाती है। मुख्य पूजा 26 अक्टूबर को सूर्यास्त के समय हुई। छठ पूजा उत्तर भारत खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। इस दौरान सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर उपासना की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठ देवी, सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। इस दिन सूर्य की भी पूजा की जाती है। माना जाता है जो व्यक्ति छठ माता की इन दिनों पूजा करता है छठ माता उनकी संतानों की रक्षा करती हैं। मंगलवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ चार दिनों तक चलने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ प्रारंभ हुआ है। छठ पर्व को लेकर पूरे बिहार का माहौल भक्तिमय हो गया है। पटना सहित बिहार के शहरों से लेकर गांवों तक में छठी मइया के कर्णप्रिय और पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं। छठ को लेकर सभी क्षेत्रों में सफाई की गई है तथा रोशनी की पुख्ता व्यवस्था की गई है। पर्व के तीसरे दिन गुरुवार शाम व्रतधारी जलाशयों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य देंगे।


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