हल्द्वानी (Haldwani)  : कुमाऊं के प्रवेश द्वार के नाम से जाने जाना वाला स्थान हल्द्वानी। हल्दू नाम के पेड के यहाँ बहुतायत से पाए जाने की वजह से इस जगह का नाम हल्द्वानी पड़ा। कुमाऊं के पहाड़ी क्षेत्र पर जाने के लिए आपको हल्द्वानी से गुजरना होता है इसलिए इसे कुमाऊँ का प्रवेश द्वार (Gateway to Kumaon) भी कहा जाता है। पिछले कुछ वर्षो से पहाड़ी इलाकों  व दूर दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों ने भी यहाँ की सुगमता व उपलब्ध सुविधाओं से आकर्षित हो हल्द्वानी में अपना एक घर/ मकान बना लिया है, जिस वजह से यह काफी घनी आबादी वाला क्षेत्र बनने की ओर अग्रसर है।

   रेलवे स्टेशन, अंतर्राज्जीय बस अड्डा, अंतर राष्ट्रीय स्टेडियम, एअरपोर्ट जैसी सुविधाएँ हल्द्वानी शहर को और महत्वपूर्ण बनाती हैं। हल्द्वानी से देश के किसी भी दुसरे राज्य मे जाने के लिए बस, टैक्सी या रेल जैसे साधन आसानी से उपलब्ध हैं। दिल्ली, बरेली, देहरादून, जयपुर जैसे शहरों व चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान जैसे पडोसी राज्यों के लिए नियमित रूप से बसे व रेल चलती हैं साथ ही पहाड़ी गंतव्यों जैसे नैनीताल, भवाली, भीमताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, मुनस्यारी, रानीखेत, मुक्तेश्वर, कौसानी, ग्वालदम, कर्णप्रयाग आदि के लिए बसें/  टैक्सियों आदि की भी नियमित सेवाएं उपलब्ध हैं
पूरे कुमाऊँ के पहाड़ी इलाकों के लिए भी राशन, फलों व सब्जियां की मंडियां भी हल्द्वानी में ही स्थित है और उनकी आपूर्ति भी यही से होती है। भवन सामग्री जैसे रेत, बजरी, ईट, लोहा, सीमेंट, टाइल्स आदि की सामग्री भी यही से पुरे कुमाउं के लिए यही से जाती हैं।
परिवहन, व्यापारिक, औद्योगिक, पर्यटन केंद्र होने के साथ हल्द्वानी सांस्कृतिक केंद्र भी है। यहाँ पर कई सामाजिक व सांकृतिक सस्थायें भी कार्यरत हैं जिनके तत्वाधान में समय समय पर यहाँ सांस्कृतिक गतिविधियाँ होते रहती हैं।
हल्द्वानी के लोगों में ईश्वर के प्रति गहरी आस्था के झलक यहाँ लगभग हर चौराहे, मोहल्ले में प्रतिष्ठित मंदिरों से प्रकट होती है। सभी धर्मों के सभी पर्वों, त्योहारों को यहाँ पारस्परिक सद्भाव से मनाया जाता है।