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घोड़ाखाल गोलू मंदिर में अर्जी लगाने व घंटी चढ़ाने का सिलसिला शुरू

कोरोना काल में बीते लंबे समय के बाद जहां एक ओर जीवन की दिनचर्या सामान्य हो रही है, वहीं ईश्वर के प्रति आस्था का सिलसिला भी शुरू हो गया है। नैनीताल के घोड़ाखाल स्थित गोलू मंदिर में भी इस वर्ष फरवरी के बाद अब अर्जियां लगाने व घंटियां चढ़ाने का सिलसिला जारी हो गया है। न्याय के देवता कहे जाने वाले गोल्ज्यू मंदिर में अनलॉक प्रभावी होने के बाद मंदिर में करीब सौ से अधिक लोगों ने अर्जी के माध्यम से गुहार लगाई जा चुकी है।

बता दें कि घोड़ाखाल स्थित गोलू देव मंदिर की आस्था ने न केवल देश के बल्कि विदेशी भक्तों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है। गोलू को विदेशों में जस्टिस द ऑफ गॉड के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि गोल्ज्यू के दरबार में अर्जी लगाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही खास बात है कि जिन भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं, वह यहां घंटी चढ़ाने आते हैं। इसलिए इस मंदिर को घंटियों का मंदिर भी कहा जाता है। वर्तमान में यहां हजारों की तादात में घंटियां चढ़ाई गई हैं। मुख्य पुजारी रमेश जोशी, गणेश जोशी, महेश जोशी, जीवन जोशी ने बताया कि 1955 में नेपाल के पूर्व पीएम गिरिजा प्रसाद कोइराला ने घंटी चढ़ाई। और उस घंटी के टूटने पर 1990 में वह दोबारा घंटी चढ़ाने पहुंचे। जब कोइराला राजनीतिक गतिविधियों से परेशान चल रहे थे, तभी उन्होंने घोड़ाखाल मंदिर में समस्या से निजात दिलाने की प्रार्थना की। परेशानियों से निकलने के बाद वह फिर यहां दर्शन को पहुंचे। वहीं 1991 में नेमिल डेंट नामक अंग्रेज ने यहां एक विशाल घंटी चढ़ाई। जोकि तत्कालीन समय में मंदिर की सबसे बड़ी घंटी थी। इससे पहले 1946 वह यहां आए थे, इसके बाद उन्हें जेल हो गई थी, जेल से छूटने के बाद मंदिर आने और दर्शन करने की प्रार्थना की थी। सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के समीप 52 कोठी में रह रहे जनरल व्हीलर ने 1900 में मंदिर में शंख घंटी की आवाज पर पाबंदी लगा दी। बताते हैं कि उसी रात व्हीलर की चारपाई टूटने के साथ कमरे का सामान उथल पुथल हो गया। इसे देख व्हीलर ने गोलू की शक्तियों को जानकार मंदिर में रोज पूजा – अर्चना की।


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