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आबकारी आयुक्त के शपथपत्र से हाईकोर्ट अंसतुष्ट

हाईकोर्ट ने पूर्व के आदेश का अनुपालन नहीं करने के मामले में आबकारी आयुक्त द्वारा दिए गए शपथपत्र के अवलोकन के बाद नाराजगी व्यक्त की। शपथपत्र से संतुष्ट न होने की बात कहकर न्यायालय ने दो सप्ताह में दोबारा से शपथपत्र पेश करने को कहा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस बार स्पष्ट शपथपत्र पेश नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ चार्ज फ्रेम करने की कार्यवाही की जाएगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ में हुई।

बता दें कि शराब के ठेकों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछली तिथि पर आबकारी आयुक्त को एक माह के भीतर पुनः शपथपत्र दाखिल करने के आदेश दिए थे। इसके अनुपालन में आबकारी आयुक्त सुशील कुमार ने सोमवार को कोर्ट में शपथपत्र पेश किया। इसके अवलोकन के बाद पर एकलपीठ ने असंतुष्टता जाहिर की। याचिकाकर्ता की आपत्ति पर कोर्ट ने माना कि विपक्षीगणों की तरफ से दाखिल शपथपत्र न्यायालय को गुमराह करने वाला है। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार दोषी शराब दुकान संचालकों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उनके बचाव में गलत तथ्य पेश कर रही है।

यह है शपथ पत्र

शपथपत्र में आबकारी विभाग द्वारा कहा गया है कि गरुड़ तहसील के अंतर्गत सिरकोट कंधार में स्थित शराब की दुकान में बिजली संयोजन नहीं होने से अभी तक आईपी एड्रेस युक्त सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए हैं। शपथपत्र में दिए गए तथ्यों के अनुसार कुल 553 शराब की दुकानों में से अभी तक 414 दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लग पाए हैं। जबकि प्रदेश में स्थित कुल 552 बार में से केवल 69 बार में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

अधिवक्ता ने दायर की याचिका

गरुड़ (बागेश्वर) निवासी अधिवक्ता डीके जोशी ने मामले में याचिका दायर की है। इसमें हाईकोर्ट से प्रार्थना की है कि वह प्रदेश सरकार को निर्देश दे कि वह शराब बंदी संबंधी आबकारी अधिनियम 1910 के प्रावधानों को लागू करे। 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब नहीं बेचे जाने संबंधी प्रावधानों का पालन करे। शराब की दुकानों व बार रेस्टोरेंट में आईपी एड्रेस युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

मद्य निषेध अधिनियम के दिए थे आदेश

29 अगस्त 2019 को उपरोक्त याचिका पर अंतिम फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 6 माह के भीतर मद्य निषेध नीति बनाने के आदेश दिए थे। साथ ही सभी शराब की दुकानों, बार आदि में आईपी एड्रेस युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश देकर इनकी स्थापना को दो माह का समय दिया था। लेकिन समय पर उक्त फैसले का राज्य सरकार द्वारा पालन नहीं होने पर अधिवक्ता डीके जोशी ने जुलाई 2020 में अवमानना याचिका दायर की है। इसमे सचिव और आयुक्त आबकारी उत्तराखंड शासन को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है।

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