For a better experience please change your browser to CHROME, FIREFOX, OPERA or Internet Explorer.
कोरोना काल में लगाया मशरूम का प्लांट, रोजना तीन से पांच क्विंटल उत्पादन

कोरोना काल में लगाया मशरूम का प्लांट, रोजना तीन से पांच क्विंटल उत्पादन

लालकुआं : कोरोना काल में नैनीताल जिले के लालकुआं के काश्तकार ने मशरूम उत्पादन का हाईटेक प्लांट लगाकर स्वरोजगार की दिशा में अभिनव प्रयोग किया है। करीब पौन बीघा में रूम में तैयार प्लांट के उत्पादन की पहली फसल आ चुकी है। जिसे लेकर वह काफी उत्साहित हैं। प्लांट से करीब एक दर्जन लोगों को रोजगार मिला हुआ है। सबसे अच्छी बात है कि इसमें वर्षभर मशरूम का उत्पादन होता है। फुली एयर कंडीशन्ड मशरूम के प्लांट से दूसरों लोगों को भी प्रेरणा मिली है। लोग काश्तकार से प्लांट शुरू करने की पूरी प्रक्रिया के बारे में आकर पूछ रहे हैं।

कोरोना काल में जब पूरा देश रोजगार व आर्थिक संकट से जूझ रहा है ऐसे में भाजपा नेता व गंगारामपुर हल्दूचौड़ के वरिष्ठ काश्तकार लाल सिंह धपोला ने मशरूम उत्पादन प्लांट लगाकर मिसाल कायम की है। उन्होंने गंगारामपुर हल्दूचौड़ में अगस्त महीने में मशरूम के हाईटेक प्लांट धपोला मशरूम उत्पादन प्लांट का निर्माण किया है। राज्य सरकार द्वारा संचालित उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के हॉर्टिकल्चर मिशन फॉर नार्थ ईस्ट एवं हिमालयन स्टेटस योजना के तहत करीब एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित प्लांट में वर्ष भर पैदावार होगी। वर्तमान में प्लांट से मशरूम की पहली खेप निकल रही है।

धपोला बताते हैं कि कोरोना काल मे हर जगह रोजगार का संकट पैदा हो गया था, ऐसे में उन्होंने वर्ष भर मशरूम उत्पादन करने वाला प्लांट लगाने का निर्णय लिया। स्वरोजगार की दिशा में सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का भी लाभ लिया। मशरूम की करीब सात लाख रुपए की पहली खेप निकल गई है। उन्होंने बताया कि प्लांट से वर्ष भर में छह खेप निकल जाएगी। प्लांट में एक दर्जन लोगों को रोजगार भी दिया जा रहा है।

पंतनगर के वैज्ञानिक ने किया प्लांट का निरीक्षण

रविवार को पंतनगर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक अरुन कुशवाहा ने प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मशरूम उत्पादन में बरती जाने वाली सावधानियों के के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूप उत्पदान में ऐसी का टेम्परेचर मेंटेन रखना सबसे जरूरी होता है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ता है।

पहली खेप में निकली 50 कुंतल मशरूम

वर्तमान में प्लांट से पहली खेप निकल रही है। रोजाना तीन से पांच कुंटल मशरूम निकालकर मंडी में बेची जा रही है । पहले खेप में क़रीब 50 कुंतल मशरूम निकलने की उम्मीद है। इस बार मशरूम के दाम भी अच्छे हैं। इसलिए पहली खेप में पांच से सात लाख रुपए तक का मशरूम उत्पादन होगा।

 

मशरूम प्रोजेक्ट शुरू करने की पूरी प्रक्रिया

मशरूम उत्पादन की योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण लेना पड़ता है। काश्तकारों को सरकार द्वारा पंतनगर व ज्योलीकोट में ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण के बाद हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट में आवेदन करना पड़ता है। केंद्र सरकार द्वारा मशरूम उत्पादन के लिए दो योजनाएं संचालित की जाती हैं। नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन में 50 फीसदी की सब्सिडी व (एनईएमएच ) नार्थ ईस्ट मशरूम रिसर्च में 40 लाख रुपए पर 16 लाख की सब्सिडी दी जाती है। जिसके ऊपर की लागत कास्तकार को वहन करना होता है। करीब पौन बीघा में एक रूम का प्लांट तैयार हो जाता है। इसके अलावा जनरेटर व विद्दुत ट्रांसफाॅर्मर की आवश्यकता भी पड़ती है।


Recent Comments