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हिमलाय से उतरने वाले कस्तूरा मृग और मोनाल पक्षी शिकारियों के निशाने पर

हिमलाय से उतरने वाले कस्तूरा मृग और मोनाल पक्षी शिकारियों के निशाने पर

पिथौरागढ़ : नाभि में दुनिया की सबसे अधिक सुगंध लेकर विचरण करने वाले कस्तूरा मृग को अपना जीवन बचाने के लिए कई बार अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा। जहां मोनाल पक्षी पर बंदूकें तनी रहेंगी वहीं कस्तूरा मृग को बुग्यालों में लगाई जाने वाली आग से सामना करना पड़ेगा। प्राणी जगत में सर्वाधिक शर्मीले इन दो जीवों को अपनी चतुराई से ही अपना जीवन बचाना होगा।

उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी के चलते हिमरेखा नीचे को खिसक रही है। हिमरेखा के पास जीवन जीने वाले राज्य पशु कस्तूरा मृग और राज्य पक्षी मोनाल भी अब अपनी ठौर बदलने लगे हैंं। सुंदर फरों और लजीज मांस के लिए प्रसिद्ध मोनाल पक्षी के शिकार के लिए शिकारी उनके उच्च हिमालयी क्षेत्र से नीचे उतरने की तैयारी में अपनी भरी बंदूकों के साथ उनकी प्रतीक्षा करते हैं। दूसरी तरफ अपने बच्चों के साथ माइग्रेशन करने वाले कस्तूरा मृग का शिकार आदिम युग की तरह आग लगा कर करने वाले निर्दयी शिकारी मौसम का लाभ उठाने की फिराक में हैं।

हिमरेखा खिसक कर जिन बुग्यालोंं तक पहुंचती है वहां पर गोल घेरे में आग लगाकर कस्तूरा मृग का आदिकाल से अवैध शिकार होता रहता है। इसी तरह मोनाल भी हिमरेखा के साथ बसेरा करता है, उनका शिकार भी किया जाता है। आग के गोल घेरे में कस्तूरा मृगों का शिकार होने से नन्हे मादा कस्तूरी को भी जान गंवानी पड़ती है। यूं तो शिकारियों का इरादा कस्तूरी धारण करने वाले नर कस्तूरा का शिकार होता है ताकि कस्तूरी मिल सके। शिकार का जो तरीका है वह इतना निर्मम है कि मात्र दो माह पूर्व जन्म लेने वाले कस्तूरा के कुछ ही भाग्यशाली बच्चे मध्य हिमालय तक पहुंच पाते हैं।

पिथौरागढ़ के वनाधिकारी डाॅ. विनय भार्गव ने बताया कि मुनस्यारी व धारचूला के रेंज कार्यालयों को सतर्क कर दिया गया है। वन कर्मियों की टीम वन्य जीवों के माइग्रेशन के दौरान क्षेत्र में गश्त लगाएगी। शिकारियों को चिन्हित किया जा रहा है। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। वन्य जीवों का शिकार कतई नहीं होने दिया जाएगा।

शिकारी लैस, विभाग लाचार

कस्तूरा मृग और मोनाल पक्षी का शिकार करने वाले शिकारी संसाधनों से लैस होते हैं। बर्फीले क्षेत्रों में शिकार के लिए प्रवास करने के उनके पास सारे संसाधन होते हैं। वह पूरे क्षेत्र के भूगोल से परिचित होते हैं जबकि वन विभाग शीतकाल में बुग्यालों में आग लगने की सूचना पर हरकत में आता है तब तक शिकारी अपना काम कर चुके होते हैं। हालांकि वन विभाग इसके लिए क्षेत्र के पूर्व सैनिकों की मदद लेता है परंतु विभाग के पास आज भी माइग्रेशन काल में इन दो जीवों को बचाने के लिए संसाधन की कमी है।


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