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जंगलों में जानवरों की सुरक्षा पर सवाल, वन रक्षक के 65 फीसदी पद खाली

जंगलों में जानवरों की सुरक्षा पर सवाल, वन रक्षक के 65 फीसदी पद खाली

राज्य में फॉरेस्ट गार्ड के 65% पद खाली हैं, लेकिन अब तक न तो भर्ती हो पाई और न ही सुरक्षा की कोई वैकल्पिक व्यवस्था। राज्य के 39 वन प्रभागों, रिजर्व पार्क और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में कुल 3,639 वन बीटें हैं।

यहां बीते माह तक 1440 पर ही फॉरेस्ट गार्ड तैनात थे। लेकिन, कुछ दिन पहले इनमें से 144 के भी प्रमोशन हो गए। यानी वे वन दरोगा बनकर सेक्शन में चले गए।

अब 1296 फॉरेस्ट गार्ड ही हैं। बाकी बीटें खाली हैं। वन कर्मचारियों का कहना है कि इनमें भी सबसे ज्यादा फॉरेस्ट गार्ड देहरादून, हरिद्वार, राजाजी, हल्द्वानी, कार्बेट और रामनगर में हैं। बाकी डिवीजनों में ना के बराबर संख्या है। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विभाग की गंभीरता साफ दिख रही है।

डॉ. हरक सिंह, वन मंत्री

 

दरोगाओं की हो तैनाती
अधिकारी-कर्मचारियों के अनुसार, वन रक्षक के पद खाली होने का बड़ा कारण उनके लगातार प्रमोशन हैं। वन विभाग ऐसी व्यवस्था लागू करे कि वन दरोगाओं को ही पद खाली रहने तक बीटों का चार्ज दे दिया जाए। ताकि निगरानी की जा सके।

वन्यजीव सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है। हमने 1,218 पदों पर भर्ती निकाली है, जिसे जल्द पूरा कराने की कोशिश है। नई भर्ती नहीं होने तक इन बीटों की सुरक्षा के लिए अफसरों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने
के निर्देश दिए हैं।


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